60 प्रतिशत प्रभारियों के भरोसे स्कूल

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विदिशा। जिले में 60 प्रतिशत विद्यालय प्रभारियों के हवाले हैं। जिससे शिक्षण व्यवस्था चरमरा रही है। जिन विद्यालयों में प्राचार्य नहीं हैं, वहां के परिणाम भी संतोषजनक दिखाई नहीं दे रहे। इसके अलावा जिले में विभिन्न विषय-विशेषज्ञों के शिक्षकों को मिलाकर 20 प्रतिशत के आसपास पद खाली पड़े हुए हैं। वीआईपी जिला होने के बाद भी शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरती दिखाई दे रही है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
विदिशा जिले में प्रारंभिक शिक्षा के संचालन हेतु विद्यालयों में पदों की स्वीकृति के अनुरूप वर्षों से भर्ती न हो पाने के कारण काफी पद रिक्त पड़े हैं।
यदि हम इस पर नजर डालें तो पद पूर्ति का 50 प्रतिशत के लगभग आंकड़ा परिलक्षित हो रहा है। ऐसी परिस्थितियों में विद्यालय का संचालन बच्चों में शिक्षा का स्तर स्टाफ के अभाव में कैसे संभव है? इसकी कल्पना हम और आप कर सकते हैं, किंतु शासन में बैठे नुमाइंदे एसी में बैठकर नियम बनाने में मसगुल हैं, जो सामान्य जन अपने नीहित स्वार्थों के लिए न्यायालय में पहुंचकर नीतियों का विखंडन कर देते हैं। 
ऐसी स्थिति में शासन स्तर पर सोच रखने वाले संगोष्ठी और गोष्ठियों के साथ फील्ड में कार्य करने वाले लोगों का लाभ लेने की नीतियां बनाकर उनका शिक्षा के कार्य में निर्धारण किया जाए। इसके लिए प्रयास होने चाहिए, ताकि प्राथमिक स्कूलों से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूलों तक प्रधान अध्यापकों और प्राचार्यों की नियुक्ति हर संभव हो सके। जिले के मानचित्र में देखें तो 20 प्रतिशत पद विभिन्न शंकाओं और विषय विशेषज्ञों के अलावा शिक्षकों के खाली पड़े हैं।
वहीं जिले के विभिन्न स्कूलों में पदस्थ लगभग 50 से अधिक शिक्षकों ने अपने मूल कर्तव्य से नाता तोड़कर निर्वाचन तथा विभिन्न कार्यालयों में अटैचमेंट करा रखा है। जिले में तीन-चार ऐसे स्कूल हैं, जिनके दो से पांच शिक्षक अपने स्कूलों से नाता तोड़े हुए हैं, यह सिलसिला एक-दो बरस से नहीं बल्कि 10-15 सालों से देखने को मिल रहा है।
जिम्मेदार परिचित हैं शिक्षा व्यवस्था से
स्कूलों में पदों की स्वीकृति के बाद भर्ती नहीं होने से जिले के आला अफसरों के अलावा जनप्रतिनिधि भी भली भांति परिचित हैं। हाल ही में स्कूल चलो अभियान के तहत प्रभारी मंत्री रामपाल सिंह राजपूत और स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन के सामने जिले में व्याप्त प्राचार्यों के पद स्वीकृत के बाद खाली पड़े पदों को लेकर मामला सामने आया था, जिस पर उन्होंने प्रमोशन के बाद पद भरने और खाली पड़े पदों पर शीघ्र भर्ती की बात कही थी, लेकिन अभी तक ऐसी कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे पदों को भरने का सिलसिला शुरु हुआ हो।
सातों ब्लॉक में प्रभारी बीईओ के भरोसे शिक्षा व्यवस्था
स्कूल चले अभियान के तहत कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे का रागअलाव करने वाले शिक्षा के मुखिया सहित आला अफसरों ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को किस रूप में लेकर कार्यप्रणाली तैयार की है, यह समझ से परे है। हालात यह हैं कि विदिशा जिले के सातों ब्लाकों में प्रभारी बीईओ कार्य कर रहे हैं और इनसे अपेक्षा की जा रही है कि वह ठीक ढंग से अपने अधीनस्थों से शिक्षा की अलख जलाकर बच्चों तक पहुंचाएं, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षा की व्यवस्था चरमरा रही है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में 95 प्रतिशत शिक्षक अपडाउन करते हैं और वह अपना आधे ज्यादा समय आने-जाने में बसों में निकल देते हैं और बच्चे शिक्षक के इंतजार में स्कूलों के बाहर बैठे रहते हैं और शिक्षक बसों में दिखाई देते हैं। इस व्यव्स्था के पीछे सबसे ज्यादा दोषी है तो वे अधिकारी और जनप्रतिनिधि हैं जो एसी में बैठकर शिक्षा व्यवस्था की नीतियों को तय करते हैं। यदि इस व्यवस्था में बदलाव लाना हो तो एसी से बाहर निकलकर जो लोग फील्ड में रहकर कार्य करते हैं उनसे पूछकर नीतियां बनाई जाएं तो शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आ सकता है और चरमराती शिक्षा नीति पटरी पर दौड़ सकती है।