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स्कूलों में समय पर नहीं पहुंचते शिक्षक, बच्चे खोलते है स्कूल के ताले
विदिशा। बच्चे स्कूलो का ताला खोलते है, झाडू लगाकर बैठते हैं, इतने में शिक्षिकाएं पहुच जाती हैं। और शुरू हो जाती है डयूटी। हम बात कर रहे हैं शासकीय स्कूल कन्या शाला चौपड़ा की जहां समय पर शिक्षिकाएं नही पहुंचती।
शनिवार को सुबह 8 बजे मात्र दो शिक्षिका मौजूद थी जबकि इस स्कूल में सात लोगों का स्टाप है। लेकिन समय पर शिक्षक नहीं पहुंचते हैं। जब राष्ट्रीय गान हो चुका था तब तीसरी शिक्षिका स्कूल पहुंची थीं। कुल मिलकर जिला मुख्यालय पर शिक्षा विभाग भगवान भरोसे चल रहा है। ऐसा ही कांवेट स्कूल के सामने संचालित होने वाले माध्यमिक शाला है जहां शिक्षिक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं और बच्चे स्कूल के बाहर खड़े रहते हैं। इससे साफ होता है कि मोटी पगार पाने वाले शिक्षक आठ घंटे स्कूल में नहीं विताते हैं। जबकि प्रायवेट स्कूलों में कम तनख्वाह के बाद स्टाप पूरे समय स्कूल में रहता है। और यही वजह है कि प्रायवेट स्कूलों का रिजल्ट सरकारी स्कूलों से अच्छा रहता है।
मुख्यालय पर यह व्यवस्था तो ग्रामीण क्षेत्रों से कल्पना करना बेईमानी है-
जिला मुख्यालय पर स्कूल समय पर नहीं खुलते हैं। तो ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से समय पर खुलने की उम्मीद करना बेईमानी होगी। हालात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 90 प्रतिशत स्कूल संचालित होते हैें ओर इन स्कूलों में पूरा स्टाप अपडाउन करता है। और समय पर नहीं पहुंचता बच्चे बस का इंतजार करते रहते हैं। जब बस पहुंचती ही तब जाकर स्कूल खुलते हैं। यह नाजरा आए दिन मिल रहा है। शिक्षा महकमें के जिम्मेदार आला अफसर इस बात से परिचित हैं इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।













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