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विदिशा। बच्चों का मन बहुत चंचल होता है, उनके सामने भजन कीजिए, जिससे उनका मन अहित की ओर न जाए। आप लोग उनके अभिभावक हैं, माता-पिता हैं, पालक हैं, उनका पालन ऐसा करो जिससे उनका भविष्य सुरक्षित रहे। उक्त उद्गार शीतलधाम पर चल रहे चार्तुमास के दौरान आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कहा कि आपने भक्ति की गुणानुवाद किया, इससे उनको आनंद आता है। ऐसे में उनको छोटी-छोटी बातों की शिक्षा प्रदान की जा सकती है। आचार्यश्री ने पढ़ाई कर रहे बच्चों को मोबाइल दिए जाने का कड़ाई से मना किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसे साधन प्रदान करें, जिससे मन न भटके। यदि आज आप ब्रेक नहीं लगाएंगे, तो कल वह ऊपर से नीचे की ओर भी गिर सकते हैं। आज बच्चों को मोबाइल देते हैं, वह कहां जा रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, आपको कोई जानकारी नहीं है। आप लोग इस बात को जानते हुए भी उसको इस प्रकार प्रोत्साहित करते हैं, उन्होंने वर्तमान ड्रेस पर भी कहा पहनावा ऐसा हो, जिसमें आपकी संस्कृति झलकती हो, लेकिन देखने में आ रहा है कि हमारे सामने इस प्रकार की ड्रेस आधी-अधूरी पहनकर आ जाते हैं अथवा ऐसी ड्रेस पहनते हैं, जो सड़क पर झाड़ू लगाते हैं। इस प्रकार के पहनाव से भी जीवन में बहुत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि 50 साल का व्यक्ति ऐसी ड्रेस पहन रहा है, जो सूट है न पजामा। कम से कम भगवान की पूजन करो तो पूजन की ही ड्रेस में करना चाहिए। नियम के बिना जीवन चला नहीं करता। आप लोग भविष्य में इस बात का ध्यान रखें। यदि आपके पास धन बहुत है, तो उसका उपयोग निर्धन व्यक्तियों की सहायता कर करो। कुछ ऐसा करो कि उसकी सहायता भी हो जाए और आपका मन भी लग जाए। शुक्रवार को इंदौर से श्रावक बंधु आए, जिन्होंने आचार्यश्री का पूजन किया।













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