समय पर चलने वाला खुद को बना सकता है श्रेष्ठ

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शीतलधाम पर संत शिरोमणी आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने प्रात:कालीन धर्मसभा में कहा
विदिशा। उत्साह और उमंग में उम्र का कोई बंधन नहीं होता, किन्तु इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कौन से कार्य करने योग्य हैं और कौन से कार्य नहीं। जिंदगी के बीच में जो नहीं करने योग्य कार्य थे, वह भी कर डालें और कर्म बंध गए। श्वांस-श्वांस पर अपने आपको संभलना चाहिए, कोई भी कार्य ऐसा न करें, जिससे कर्म बंध हों।
उक्त उद्गार विदिशा नगर में शीतलधाम पर पधारे संत शिरोमणी आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने प्रात:कालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि द्रव्य का स्वभाव परिणमनशील है। वह रुकता नहीं, समय आपको मिला है, समय को बांधकर समयानुसार चलें, जिससे वह अपने आपको श्रेष्ठ बना सकता है। उन्होंने कहा कि यह भगवान के विम्ब का अतिशय है, तो बुजुर्गों के पैरों में थिरकन आ जाती है।
13 को होगी चार्तुमास कलश की स्थापना 
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि नगर में संत शिरोमणी आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का यह प्रथम चार्तुमास है एवं शीतलधाम पर कलश स्थापना 13 जुलाई रविवार की दोपहर 2 बजे होगी। जिसमें बाहर से बड़ी संख्या में भक्तजनों के पधारने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े छह बजे से भगवान श्री आदिनाथ स्वामी बर्रो वाले बाबा का मस्ताभिषेक एवं शांतिधारा आचार्यश्री के सानिध्य में होगी। इसके बाद भक्ति संगीत से पूजन और आहार चर्या संपन्न होगी।