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विदिशा। शिक्षा के कर्तव्य को छोड़कर अन्य कार्य से अटैच हुए शिक्षकों का मूल विभाग से मोह भंग होता दिखाई दे रहा है और अपने कर्तव्य से मुंह मोड़कर मजा मार रहे हैं। जबकि चुनाव होने के बाद उच्च न्यायालय सीएम और शिक्षामंत्री भी वापसी के आदेश दे चुके हैं।
स्कूल चलें अभियान के अंतर्गत घर-घर शिक्षा की अलख जगाने और शिक्षकों को स्कूल में मौजूद रहकर बच्चों को शिक्षा देने की पाठशाला के निर्देश समय-समय पर आयुक्त शिक्षा केन्द्र और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी किए जाते हैं। इतना ही नहीं निर्वाचन में अटैचमेंट के रूप में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी,
उनके वापसी के निर्देश भी दिए जा चुके हैं, लेकिन हालात यह हैं कि जिले में आधा सैकड़ा से अधिक शिक्षक निर्वाचन की आड़ में सफेद हाथी सिद्ध हो रहे हैं और वह कई वर्ष बीत गए, लेकिन वह अपने मूल विभाग में आज तक नही पहुंच पायें हैं, और मुख्यालय पर बैठ कर दूसरों पर रोब झाड़ते दिखाई देते हैं जबकि इन महाश्य का मूल कार्य शिक्षण कराना हैं। निर्वाचन ड्यूटी के नाम पर देखे तो 8 ऐसे शिक्षक है जो 15 से 20 बर्षो से मुख्यालय पर रहकर अपनी नौकरी में मजे मार रहें इसके अलावा तहसील कार्यालय, अनुविभागीय कार्यालय, जिला कोषालय के अलावा जिला पंचायत और कलेक्टे्रट कार्यालय के विभिन्न दफ्तरों में भी कई शिक्षक अटेंच रहकर अपनी सेवाऐं दे रहें हैं। लेकिन राजनीति में ऊचीं पैठ और अधिकारियों की आब भगत के चलते मजाल किसी के कोई इन की और टेंड़ी निगाहें से देख ले, और अपने मूल विभाग में भेजने की जहमत दिखा दें। अटैचमेंट किए गए कर्मियों में शिक्षक, अध्यापक, सहायक शिक्षक, संविदा शिक्षक और भृत्य शामिल हैं, जो विभिन्न स्थानों पर सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षकीय कार्य से दूरियां बनाए हुए हैं।
उनके वापसी के निर्देश भी दिए जा चुके हैं, लेकिन हालात यह हैं कि जिले में आधा सैकड़ा से अधिक शिक्षक निर्वाचन की आड़ में सफेद हाथी सिद्ध हो रहे हैं और वह कई वर्ष बीत गए, लेकिन वह अपने मूल विभाग में आज तक नही पहुंच पायें हैं, और मुख्यालय पर बैठ कर दूसरों पर रोब झाड़ते दिखाई देते हैं जबकि इन महाश्य का मूल कार्य शिक्षण कराना हैं। निर्वाचन ड्यूटी के नाम पर देखे तो 8 ऐसे शिक्षक है जो 15 से 20 बर्षो से मुख्यालय पर रहकर अपनी नौकरी में मजे मार रहें इसके अलावा तहसील कार्यालय, अनुविभागीय कार्यालय, जिला कोषालय के अलावा जिला पंचायत और कलेक्टे्रट कार्यालय के विभिन्न दफ्तरों में भी कई शिक्षक अटेंच रहकर अपनी सेवाऐं दे रहें हैं। लेकिन राजनीति में ऊचीं पैठ और अधिकारियों की आब भगत के चलते मजाल किसी के कोई इन की और टेंड़ी निगाहें से देख ले, और अपने मूल विभाग में भेजने की जहमत दिखा दें। अटैचमेंट किए गए कर्मियों में शिक्षक, अध्यापक, सहायक शिक्षक, संविदा शिक्षक और भृत्य शामिल हैं, जो विभिन्न स्थानों पर सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षकीय कार्य से दूरियां बनाए हुए हैं।
न्यायालय से लेकर सीएम का आदेश बेअसर
उच्च न्यायालय का आदेश हैं कि चुनाव को छोड़कर अनय किसी कार्य में शिक्षको को नही लगाया जायें। इसके अलावा मुख्यमंत्री शिवराज चौहान और हाल ही स्कूल चले अभियान के अंतर्गत विदिशा दौरे पर आए। शिक्षा मंत्री ने भी शिक्षकों के अटैचमेंट को समाप्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन लगता है विदिशा में सभी माननीय और न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर दिया जाता है। इसी की बानगी कहें कि जिले में सैंकड़ों की संख्या में शिक्षक अपने मूल कार्य से अलग हटकर बेगारी के कार्य में लगे हैं और बच्चों के भविष्य की ओर उनका ध्यान नहीं है।
जिले के कई विभागों में अटैच हैं शिक्षक
जिले के विभिन्न स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को अटैच किया गया है, उनमें सचिन भार्गव को कोषालय, राजीव जैन, राजेश सक्सेना तह.ग्यारसपुर, अनिल शर्मा, ब्रजेश नारायण बवेले, ओमप्रकाश दीक्षित, अनिल शर्मा, जगदीश सिलावट, खिलान सिंह मोगिया, श्रीमती अभिलाषा शर्मा, श्रीमती सुविधा श्रीवास्तव को जिला निर्वाचन कार्यालय, दीपक शर्मा, आनंद देव शाक्य, हरिनारायण जाटव को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के विभिन्न तहसीलों में पदस्थ किया गया है। इसके अलावा तहसील कार्यालय में राजेन्द्र निगम, झलकन सिंह रघुवंशी, अरुण कुमार जैन, संजय चतुर्वेदी, हरगोविंद नरवरिया, आशाराम लोधी, मदनबाबू कुशवाह, विशाल दिनकर को अटैच किया गया है। इसके अलावा जिले में कई ऐसे शिक्षक हैं, जो विभिन्न दफ्तरों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनकी सूची तैयार की जा रही है। 10-15 वर्षों से निर्वाचन कार्य में शिक्षक मजे मार रहे हैं।
रिपोर्ट के आधार पर किया अटैचमेंट
ग्यारसपुर जनपद सीईओ अजय सिंह वर्मा द्वारा हाल ही में दो शिक्षकों के अटैचमेंट किए गए हैं। सुमेरचक से मेनदेर सोनाली दांगी और चकएरन से नीतू सपे्र का अटैचमेंट हुआ है। सीईओ साहब का कहना है कि बीआरसी की रिपोर्ट आई थी और शिक्षकों की मांग थी, उसी आधार पर अटैचमेंट किया गया है। अटैचमेंट को समाप्त करने के निर्देश सीएम और हाल ही में शिक्षामंत्री द्वारा दिए गए हैं। इस पर उन्होंने कन्नी काट ली और कुछ कहने से कतराते रहे। बाद में उनका कहना था कि शासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए था। अब उसको अमल में लाया जाएगा।
इनका कहना है
चुनाव के दौरान जिन शिक्षकों को निर्वाचन के लिए अटैच किया गया था। उनकी वापसी के लिए पत्र लिखे गए हैं जिसमें हमें धीरे-धीरे सफलता मिल रही है।
- एचएन नेमा, डीईओ




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