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विदिशा। संसार में जो कुछ भी सौदा होता है, वह विश्वास के साथ होता है, विश्वास के साथ ही हम पदार्थ को खरीद सकते हैं एवं बेच सकते हैं। हमारा जीवन प्रत्येक क्षण घट रहा है, बढ़ नहीं रहा।
उक्त उद्गार आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने प्रात:कालीन प्रवचन सभा में शीतलधाम पर व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा कि यदि आपको विश्वास है, यह मणी है तो वह मणी है। उस मणी पर चंद्रमा की किरण पड़ेगी तो उन मणियों के ऊपर पडऩे वाले जल की शीतल बूंदों के पडऩे से हमें शीतलता महसूस होती है। उन्होंने कहा जैसे आंखों में से पानी आता है, क्या आंखों में पानी है, आंखों में पानी तभी आता है, जब हमारे भीतर संवेदनाएं होती हैं, दुख में दुख के आंसू एवं सुख में सुख के आंसू आते हैं, वह दिखते नहीं। आचार्यश्री ने कहा यदि हमारे पास सम्यक दर्शन ज्ञान और चरित्र है, लेकिन जब तक हमारी दृष्टि भगवान की ओर नहीं जाएगी, तब हम हमारे अंदर से स्रोत भावों का प्रगट नहीं हो सकता। आचार्यश्री ने कहा कि हमारे बैठने के निमित्त से आपका मोह यदि गल जाता है, तो इससे अच्छा समय और कोई नहीं। उन्होंने कहा कि समय बहुत कम है, यदि आपने समय का सदुपयोग किया तो आप भी उस मणी को प्राप्त कर सकते हैं। चंद्रकांत रूपीमणी को दिला सकती है, यह मणी कोइ और नहीं हमारे अंदर का विश्वास ही है, जो पंच परमेष्ठी की आराधना से हमारे अंदर गुणों को प्रकट कर देता है एवं हमारे अंदर के दोषों को समाप्त कर देता है। यह क्षण भी आपको बहुत ही मौलिक है। समाज प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि प्रात:काल की बेला में आचार्यश्री के सानिध्य में भगवान श्री आदिनाथ स्वामी बर्रो वाले बाबा के चरणों का अभिषेक किया गया। तत्पश्चात आचार्यश्री की सामूहिक पूजा के उपरांत आहारचर्या संपन्न हुई। आज के आहार का सौभाग्य डॉ.एमसी जैन, डॉ.राजीव चौधरी चिरंजीवी हॉस्पिटल वालों को प्राप्त हुआ। उन्होंने इस अवसर पर दान की घोषणा की। बाहर से पधारने वालों में खुरई जैन समाज का प्रतिनिधि मंडल आए एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।




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